झारखंड की लोक चित्रकला शैली : जादोपटिया
- आर के नीरद
जादोपटिया लोककला के शोधकर्ता
अध्यक्ष, आदिवासी चित्रकला अकादमी, दुमका
बहरहाल, दुमका आने के बाद जनजातीय संस्कृति और इतिहास से जुड़े ऐसे विषय की मेरी खोज का क्रम जारी रहा. उस समय तक बिहार की मधुबनी पेंटिंग के विषय में मैं बहुत कुछ ज्ञान प्राप्त कर चुका था और मेरा विश्वास था कि संताल परगना के जनजातीय समाज से जुड़ी भी कोई रैखिक सांस्कृतिक परंपरा जरूर रही होगी. तब तक संताल भित्ती चित्र से मेरा साक्षात्कार बहुत गहराई तक हो चुका था. उसी खाज ने मुझे जादोपटिया पेंटिंग तक पहुुंचाया, जो न केवल लुप्त हो चुकी थी, बल्कि कला जगत में उसकी कोई चर्चा तक नहीं थी. कला- संस्कृति विभाग, बिहार सरकार को भी उसके विषय में जानकारी नहीं थी. गांव में लोग उसे अलग-अलग नामों से जानते तो थे, किंतु उसके सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति नकारात्मक अवधारणा स्थापित हो चुकी थी.
कलाकारोंं का हाल यह था कि जब हम उनके गांव पहुंचते थे, तब हमसे बातचीत करने की जगह डर कर खोतों की ओर निकल जाते थे. वे कहां-कहां बसे हुए हैं, इसकी भी ठोस जानकारी मुझे नहीं थी और न ही यह जानने का कोई स्रोत था. उस समय दुमका के उपायुक्त थे अंजनी कुमार सिंह. वे आज बिहार सरकार में मुख्य सचिव हैं. मैंने उनसे मदद मांग. उन्होंने एक सरकारी जीप, चाक और इंधन सहित, उपलब्ध कराया. जिले के सभी बीडीओ को मेंरे काम में सहयोग करने का निर्देश दिया. फिर से जादोपटिया के कलाकारों की तलाश में गांव-गांव घूमा. आज वह जादोपटिया पेंटिंग झारखंड की प्रमुख पटना, दिल्ली, हरियाणा के सूरज कुंड, दिल्ली के सरस मेले और अगरतला के सांस्कृतिक महोत्सव तक इस कला को पहुंचाया। यूनिसेफ ने 2002 का अपना कैलेंडर भी जादोपटिया शैली में डेवलप करने का अवसर हमें दिया. भारत और राज्य सरकार के कई विभागों का तो सहयोग था ही.
इस कला को बचाने के उद्देश्य से ही हमने दुमका में 'अादिवासी चित्रकला अकादमी ' की स्थापना की. मैं अध्यक्ष था,
जादोपटिया पेंटिंग
जादोपटिया चित्रकला शैली भारतीय पट चित्र शैली की श्रृंखला में मिथिला एवं कालीघाट चित्रकला की भगिनी है., जो संताल आदिवासी की सांस्कृतिक और दार्शनिक पृष्ठभूमि से जुडी। यह संतालों के सांस्कृतिक दर्शन की रैखिक थाति.
अन्य लोक चित्रकला की भांति ‘जादोपटिया’ एक पारंपरिक और पुरानी लोक चित्रकला शैली है, जो कालांतर में संताल आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित हुई. समय के साथ यह प्राय: लुप्त हो चुकी थी. अनेक प्रयासों के बाद इसे बचा लेने में सफलता मिली. आज जिस प्रकार बिहार मधुबनी पेंटिंग पर गर्व करता है. उसी प्रकार जादोपटिया पेंटिंग झारखंड का गौरव है.
आरके नीरद : 9431177865/ 8789097471

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